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‘काश हम उन तक अपनी चिट्ठियाँ पहुँचा पाए’: Poem by Janvi Sharma, Apeejay School, Tanda Road, Jalandhar

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काश हम उन तक अपनी चिट्ठियां पहुँचा पाए,
अपने दिल के उभार को बाहर ला पाए,
दिल खोलकर ग़म की कहानियां बताए,
काश हम उन तक अपनी चिट्ठियां पहुँचा पाए।
अपने दिल को सुकून दे कर,
रोते रहे हम हर पल,
अकेले होकर भी,
अकेली ना रह पाए,
काश़ हम उन तक अपनी चिट्ठियाँ पहुँचा पाए।
काश हम उस डाकिये को ढूँढ पाए,
जो पहाड़ों की ऊंचाई से होकर,
दिल के राज़ों को भेदकर,
हमारी मनोकामनाएं ले जाए,
तारों के कोष्ठ में,
उस तारे को ढूंढ पाए,
आंसुओं से उन चिट्ठियों को,
खींचकर उन्हें सजाए,
बता पाए कि हमें उनकी कितनी याद आए,
काश हम उन तक अपनी चिट्ठियाँ पहुँचा पाए,
काश़ हम उन तक अपनी चिट्ठियाँ पहुँचा पाए।


Janvi Sharma
Apeejay School, Tanda Road, Jalandhar