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Short note: ‘लाल किले की लव–कुश रामलीला :- एक अनोखा अनुभव’ by Rupesh, AIMC

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लाल किले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में आयोजित लव–कुश रामलीला में मेरा अनुभव अविस्मरणीय था। इस लेख में मैं अपने अनुभव को साझा करना चाहता हूं।

मैं सहित कुल आठ छात्रों के एक समूह को “एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन” द्वारा लव–कुश रामलीला को देखने और समझने का अवसर मिला और उसपे एक न्यूज़ पैकेज बनाने को मिला दिनांक 06/10/2024 को हमारा समूह दिल्ली के प्रसिद्ध लाल किले के लिए रवाना हुआ जहां रामलीला का आयोजन किया जा रहा था, हम वहां जैसे ही पहुंचे, पहली नज़र में ही हम वहां की लव–कुश रामलीला के मंच को देखकर हक्के–बक्के हो गए। जिस तरीके से तीन मंजिला मंच को सजाया गया था वह वाकई लुभावना था।

आगे बढ़ते हुए एक नवोदित पत्रकार के तौर पर हमने वहां का निरीक्षण किया, वहां की सारी हलचल को समझते हुए हमने अपने कैमरा को टिकने के लिए एक स्थाई स्थान ढूंढ और अपने कैमरा को टिकाया। फिर हमने रामलीला के मंचन को रिकॉर्ड किया, इसके दौरान हमें वहां आज तक की वरिष्ठ पत्रकार और एंकर श्वेता झा से मिलने और बातचीत करने का अवसर मिला, जो वहां खुद रामलीला को कवर करने आईं थीं, बातचीत के दौरान उन्होंने हमे पत्रकारिता जगत के कई सारे पहलुओं को समझाया। उनकी सारी बातों को समझते व समेटते हुए हमने अपना काम शुरू किया और इसी दौरान मुझे ” कैकई ” ( मेज़र सालू वर्मा ) से बातचीत व रिकॉर्ड करने का अवसर मिला जो खुद आर्मी में मेजर पद से रिटायर्ड हुए हैं। बातचीत के दौरान मुझे उनके रामायण व कैकई पर निजी विचार जानने को मिले जो कि वाकई मे प्रशंसनीय थे।

वहां और भी कई बड़े बड़े टीवी चैनलों के वीडियो ग्राफर भी आए हुए थे जो रामलीला के मंचन को अपने वीडियो कैमरा में कैद कर रहे थे इसके दौरान हमे उनसे भी बातचीत करने का मौका मिला, बातचीत के दौरान उन्होंने हमसे कैमरामैन की निजी और प्रोफेशनल ज़िंदगी को समझाया और हमारे आने वाले समय के लिए हमको प्रेरणा दी।

इस पूरे न्यूज़ पैकेज के दौरान न केवल हमें की कैसे एक न्यूज़ पैकेज बनाते हैं बल्कि कई अन्य पहलुओं को भी नज़दीक से जानने का अवसर मिला। हमें वहां कई कलाकारों से बातचीत का मौका मिला, कई सफाई कर्मियों से बातचीत के दौरान उनकी परेशानियों को समझने को मिला, वहां दर्शकों से रामायण पर उनके निजी विचार जाने और बातचीत की।

लव–कुश रामलीला में मेरा अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन था, बल्कि यह हमें हमारी संस्कृति और इतिहास के बारे में भी जागरूक करता है।