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‘हिमालय की बेटियाँ’: Hindi Poem by Haritika Tripathi, Apeejay School, Kharghar
Published
11 months agoon

बड़ा है वह पर्वत, उसकी चोटी ऊँची,
जिसके ऊपर उगता सूर्य,
उस पिता की कई हैं बेटी,
जिनमें स्नान करके मिलता पुण्य
बहती – बहती वे निकलती,
उन सुंदर जंगलों से,
महान हिमालय की घाटियों से,
पहुँचती खुले मैदानों में ।
वे बेटियाँ चंचल-सी,
अपने पिता के गोद में खेलती,
परंतु इतना महान पिता पाकर,
भला वे इतनी अतृप्त क्यों दिखती ?
अब वे नदियाँ विशाल दिखती,
तेज प्रवाह से बहती चलती,
वे बेटियाँ लक्ष्य प्राप्त करने,
समुद्र से मिलन कर लेती | …
महान हिमालय सोच में रहता,
अपनी चंचल बेटियों के यादों में
वह पिता चिंतित रहता,
और प्रतीक्षा करते-करते,
चुप-चुप सा बैठा रहता |