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‘एक दौड़’: Poem by Shreya Aggarwal, Apeejay School, Noida
Published
2 years agoon

खरगोश ने कछुए से पूछा –
क्यों, हो जाए एक दौड़?
कछुए ने भी कहा ,
चलो चलें उस मोड़
खबर फैली आग के जैसे
सभी आए जैसे-तैसे।
हाथी -हथिनी आए
मोर-मोरनी भी नाचे।
बन्दर आया, बंदरिया आयी,
सबने खूब उधम मचाई।
शेर राजा भी आया,
शेरनी को भी साथ लाया।
उधर तोते ने सीटी बजाई ,
इधर दौड़ भी शुरू हो गई।
खरगोश हो गया हवा-हवाई,
सबने खूब तालियां बजाई।
कछुआ बेचारा रह गया पीछे,
चल रहा था वह धीरे-धीरे।
खरगोश ने सोचा ज़रा रुक जाऊँ ,
थोड़ी गाजर खाऊँ।
खाते-खाते कब आँख लग गई ,
निकल गया कछुआ आगे,
हार गया खरगोश सोते-सोते
पहुँच गया कछुआ उस मोड़
फिर न लगाई किसी ने उससे दौड़।