सावरे के हो बैठे हैं हम तो उससे प्रेम कर बैठे हैं। सावरी सी सूरत है, आंखों में है शरारत, गालों पर लाली है, होठों की मुस्कान पर, हो जाए सारी दुनिया दिवानी है। मोर मुकुट सजाए सिर पर, हाथ में बंसी थामी हैं। कन्हैया ने तो सारी दुनिया, अपने ही रंग में रंग डाली है। मेरी पहली चाहत है कृष्ण, मेरे दिल की विरासत है कृष्ण। कृष्ण से जुदा न रह पाऊंगी, मेरी धरकण है कान्हा, मैं मर जाउंगी । Prachi, Class: 11-CApeejay School, Mahavir Marg, Jalandhar
मेरे हृदय में प्राण है गुरु मेरे जीवन का सार है गुरु पल-पल वह समझाता है मुझे जीवन का लक्ष्य याद दिलाता है। आदर्शों की मिसाल है वो कभी शांत और कभी धीर है वो हर पल संभलना सिखाता वो सही राह पर चलना सिखाता वो। पग-पग पर परछाई सा साथ निभाए संकट में भी हंसना सिखाए धैर्यता का पाठ पढ़ाए वही सच्चा गुरु कहलाए। Poem by Prachi Class: 11-C Apeejay School, Mahavir Marg, Jalandhar
In a world of dreams, a girl once stood,Unaware of the storm that soon would flood.With a twinge of pain, she sensed a change,As PCOD whispered...