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‘बाल श्रम’: Poem by Prachi, Apeejay School, Mahavir Marg, Jalandhar
Published
2 years agoon

किताबों की जगह जब,
ईटों का बोझ आता है
तो मन में एक ही ख्याल आता है।
मजबूरी यह करवाती हैं
बच्चों पर जब आ जाती है
बाल मजदूरी यह कहलाती हैं।
पढ़ने के उपकरणों को छोड़ जब
हाथों में मजदूरी को थमाती है तब
गरीबी बहुत सताती हैं।
“हाथों में जब उसके कलम को आना था,
आगे बढ़ने का जब ख्याल भी आना था,
तब, कहा से यह तूफान आ गया,
उड़ा के सारे ख्वाब ले गया।”
Prachi
Class: 11-C
Apeejay School, Mahavir Marg,
Jalandhar