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‘हिमालय की बेटियाँ’: Hindi Poem by Haritika Tripathi, Apeejay School, Kharghar
Published
5 months agoon

बड़ा है वह पर्वत, उसकी चोटी ऊँची,
जिसके ऊपर उगता सूर्य,
उस पिता की कई हैं बेटी,
जिनमें स्नान करके मिलता पुण्य
बहती – बहती वे निकलती,
उन सुंदर जंगलों से,
महान हिमालय की घाटियों से,
पहुँचती खुले मैदानों में ।
वे बेटियाँ चंचल-सी,
अपने पिता के गोद में खेलती,
परंतु इतना महान पिता पाकर,
भला वे इतनी अतृप्त क्यों दिखती ?
अब वे नदियाँ विशाल दिखती,
तेज प्रवाह से बहती चलती,
वे बेटियाँ लक्ष्य प्राप्त करने,
समुद्र से मिलन कर लेती | …
महान हिमालय सोच में रहता,
अपनी चंचल बेटियों के यादों में
वह पिता चिंतित रहता,
और प्रतीक्षा करते-करते,
चुप-चुप सा बैठा रहता |