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‘हिमालय की बेटियाँ’: Hindi Poem by Haritika Tripathi, Apeejay School, Kharghar

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बड़ा है वह पर्वत, उसकी चोटी ऊँची,
जिसके ऊपर उगता सूर्य,
उस पिता की कई हैं बेटी,
जिनमें स्नान करके मिलता पुण्य 

बहती – बहती वे निकलती,
उन सुंदर जंगलों से,
महान हिमालय की घाटियों से,
पहुँचती खुले मैदानों में ।

वे बेटियाँ चंचल-सी, 

अपने पिता के गोद में खेलती, 

परंतु इतना महान पिता पाकर,

 भला वे इतनी अतृप्त क्यों दिखती ?

अब वे नदियाँ विशाल दिखती,

 तेज प्रवाह से बहती चलती, 

वे बेटियाँ लक्ष्य प्राप्त करने, 

समुद्र से मिलन कर लेती | …

महान हिमालय सोच में रहता, 

अपनी चंचल बेटियों के यादों में 

वह पिता चिंतित रहता, 

और प्रतीक्षा करते-करते,

 चुप-चुप सा बैठा रहता |