Talent Treasure
‘Mere sapno ka Bharat’: Poem by Isha Monga, Apeejay School, Nerul
Published
2 years agoon

भारत थी सोने की चिड़िया,
बेहती थी दूध की नदियाँ,
अब जात पात के झगड़े में पिस रहा है आम इंसान,
फैली हुई है गरीबी, किसान हो रहा है परेशान
मैं गई दो हज़ार सैंतालीस में,
देखा हर जगह फैली है हरियाली,
ना कोई भुखमरी है ना कोई बीमारी
लोग मना रहे हैं रोज ईद और दिवाली।
नौकरी है हर व्यक्ति के पास,
ना कोई बेघर ना बेरोजगार
हर बच्चा है एक समान,
शिक्षा हर बच्चे का अधिकार ।
नींद खुली तो मैंने देखा,
हूँ मैं दो हज़ार तेईस में,
खिड़की खोली, झाँका बाहर
था सब वही पुराने हाल में
प्रण लिया मैंने,
अपना सपना करूँगी साकार,
बनेगा भारत फिर से सोने की चिड़िया,
साक्षात् होगा यह चमत्कार ।।
Isha Monga
Class: 7-D
Apeejay School, Nerul