
भारत की राजधानी…… जहाँ आरोपी आज़ाद है लेकिन पीड़िता को इंसाफ मांगने का भी हक़ नहीं है। जहाँ रेपिस्ट की सजा निलंबित कर दी गयी और न्याय मांगने बैठी पीड़िता को पुलिस ने Detain कर लिया। आखिर कैसा इंसाफ है यह?
यह वही दिल्ली है जो 2012 में निर्भया के साथ खड़ी थी, वो दिल्ली जो निर्भया के लिए हाथों में मोमबत्तियां और दिलों में इंसाफ की आग लेकर सड़कों पर उतर गयी थी। ऐसा लग रहा था की सबने ठान लिया हो की अब दिल्ली महिलाओं के खिलाफ जुर्म नहीं सहेगी, पर आज 2025 में उन्नाव रेप पीड़िता अकेली न्याय की आस में बैठी है, आखिर क्यों सबने आंखें मूंद ली ? आखिर क्यों दिल्ली खामोश हो गयी?
8 अप्रैल साल 2018 जब उत्तर प्रदेश के उन्नाव की एक लड़की ने पुलिस की निष्क्रियता की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश करी। उसका आरोप था की नेता कुलदीप सिंह सेंगर ने उसका सामूहिक बलात्कार किया साथ ही पीड़िता के पिता को सेंगर के इशारों पर पुलिस ने शस्त्र अधिनियम के अंदर गिरफ्तार किया और न्यायिक हिरासत में उनकी मौत हो गयी। इस केस के मुख्य गवाह की भी रहस्मयी तरीके से मौत हुई थी। आखिरकार दिसंबर 2019 को कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गयी थी साथ ही पीड़िता को CRPF सुरक्षा दी गयी थी।
3 अप्रैल 2025 को पीड़िता की CRPF सुरक्षा हटा दी गयी और 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की सज़ा दिल्ली उच्च न्यायलय ने निलंबित कर दी।
इसी के विरोध में पीड़िता विरोध प्रदर्शन पर बैठी थी, उन्होंने कहा की “ऐसा फैसला मौत के सामान है “।
न्यायलय के इस फैसले ने सवाल खड़ा किया है की जब इस तरह अरोपियों को छोड़ दिया जायेगा तो देश की बेटियां कैसे सुरक्षित रहेंगी? आखिर क्यों हमारी सरकार चुप है? क्यों रैलियों का शहर कही जाने वाली देश की राजधानी शांत पड़ी है ? क्यों इस बार दिल्ली का खून नहीं खौला? क्यों भारत की यह बेटी आज अपनों के बीच अकेले खड़ी है?
City of Rallies से Rape Capital तक दिल्ली का यह सफर एक दिन का नहीं है। निर्भया के साथ खड़े शहर के मन में गुस्सा सच्चा था, उम्मीद सच्ची थी और सरकारें जवाब देने को मजबूर थी। आज हालत बदल चुके है अब सत्ता से सवाल पूछना आसान नहीं है क्यूंकि अब न्याय मांगने वालों को हिरासत में लिया जाता है और सवाल पूछने वालों को देशद्रोही घोषित किया जाता है। उस समय लोगो में चेतना थी पर अब विरोध भी ट्रेंडिंग होने लगे है, लोग आज इंसाफ के लिए नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट के लिए पोस्ट कर रहे है। धीरे धीरे दिल्ली का जोश गुम होता चला गया क्योंकी अब लोगो के मन में गुस्से की जगह डर और संवेदना की जगह सुविधा ने ली है।
जिस शहर ने बड़े बड़े राजा बादशाहों को घुटनो पर ला दिया था, वही शहर आज खामोश है क्योंकी विरोध करना आज देशद्रोह है और सवाल करना सत्ता के लिए समस्या। हमें यह याद रखना होगा, आज अगर देश की यह बेटी हारी तो यह बस कानून की हार नहीं बल्कि पुरे समाज, पूरी दिल्ली और हमारे देश की हार होगी।
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