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Janmashtami Special- ‘कान्हा’: Poem by Prachi, Apeejay School, Mahavir Marg, Jalandhar
Published
3 years agoon

सावरे के हो बैठे हैं
हम तो उससे प्रेम कर बैठे हैं।
सावरी सी सूरत है,
आंखों में है शरारत,
गालों पर लाली है,
होठों की मुस्कान पर,
हो जाए सारी दुनिया दिवानी है।
मोर मुकुट सजाए सिर पर,
हाथ में बंसी थामी हैं।
कन्हैया ने तो सारी दुनिया,
अपने ही रंग में रंग डाली है।
मेरी पहली चाहत है कृष्ण,
मेरे दिल की विरासत है कृष्ण।
कृष्ण से जुदा न रह पाऊंगी,
मेरी धरकण है कान्हा, मैं मर जाउंगी ।
Prachi,
Class: 11-C
Apeejay School, Mahavir Marg, Jalandhar