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‘Maa’: Poem by Nidhi Ojha, Apeejay Stya University

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Course: PhD

“मां ” केवल एक शब्द नहीं
सम्पूर्ण सृष्टि का सार है।
“मां” केवल जननी नहीं
जीवन का आधार है।
“मां” के चरणों में केवल स्वर्ग नहीं,
मोक्ष का द्वार है।
मां के आंचल की छांव पाने के लिए,
 “हरि” हर युग में लेंते अवतार है।
कभी मां राधा, कभी सीता,
कभी दुर्गा है।
कभी प्रेम, कभी करुणा
और कभी ममता का भंडार है।
“मां ” केवल एक शब्द नहीं
सम्पूर्ण सृष्टि का सार है।