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वीर बाल दिवस
Published
2 years agoon
By Vipul Sonik

ਛਤ੍ਰੀ ਕੋ ਪੂਤ ਹੋ ਬਾਮਨ ਕੋ ਨਹਿ ਕੈ ਤਪੁ ਆਵਤ ਹੌ ਜੁ ਕਰੋ ॥ ਅਰੁ ਅਉਰ ਜੰਜਾਰ ਜਿਤੋ ਗ੍ਰਹ ਕੋ ਤੁਹਿ ਤਿਆਗ ਕਹਾ ਚਿਤ ਤਾ ਮੈ ਧਰੋ ॥ ਅਬ ਰੀਝ ਕੈ ਦੇਹੁ ਵਹੈ ਹਮ ਕਉ
ਜੋਉ ਹਉ ਬਿਨਤੀ ਕਰ ਜੋਰ ਕਰੋ ॥
ਜਬ ਆਉ ਕੀ ਅਉਧ ਨਿਧਾਨ ਬਨੈ
ਅਤਿ ਹੀ ਰਨ ਮੈ ਤਬ ਜੂਝ ਮਰੋ ॥
ਗੁਰਵਿੰਦਰ ਸਿੰਘ ਪਟਿਆਲਵੀ
प्रस्तावना:
वीर बाल दिवस का मतलब है वीरता भरे बच्चों का दिन। इस दिन हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों को, जिन्होंने अपने प्राणों की बाजी लगा कर देश के लिए अपना सर्वस्व दिया। इस दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि हम उन महान बालकों की महात्म्य को समझ सकें और उनकी तरह आत्मनिर्भर और वीर बन सकें।

गुरु गोबिंद सिंह जी के संतान:
गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्र थे – अजित सिंह, जुजार सिंह, जोरावर सिंह, और फतेह सिंह। इन बच्चों को बचपन से ही गुरु गोबिंद सिंह जी ने धर्म, शिक्षा, और सैन्य कला की शिक्षा दी थी। इन बच्चों ने अपने पिता की शिक्षाओं को अच्छे से ग्रहण किया और एक सशक्त सेना का नेतृत्व किया।
शहादत की कहानी:
वीर बाल दिवस का असली महत्व इन बच्चों की बहादुरी और उनके उदाहरण से आता है। जब गुरु गोबिंद सिंह जी को पता चला कि मुग़ल सेना उनके पीछे है, तो उन्होंने अपने बच्चों से कहा कि वे अपने धर्म के लिए लड़ें और अपने प्राणों को बलिदान करें।
इन बच्चों ने अपने पिता के आदेश को माना और युद्ध में अपनी बहादुरी दिखाई। ये बच्चे ताजगढ़ की किले में बचपन से ही तैयार थे और उन्होंने अपनी आत्मा को भगवान के साथ एक कर लिया। उन्होंने शहादत प्राप्त की और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
श्रद्धांजलिः
वीर बाल दिवस पर हमें इन शूरवीरों को समर्पित करना चाहिए जो अपने धर्म और देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा कर सच्चे ही वीर बन गए। इन बच्चों की बहादुरी और उनका नेतृत्व हमें एक शक्तिशाली और समर्पित नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
समापनः
इस वीर बाल दिवस पर, हमें ये याद रखना चाहिए कि हमारा देश इन शूरवीरों के बलिदान का सम्मान करता है और हमें भी उनके जैसे सच्चे और वीर नागरिक बनने का संकल्पलेनाचाहिए।