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लोहड़ी, पोंगल और मकरसंक्रांति नाम अनेक महत्व एक
Published
2 years agoon
By Aditi Shukla


जनवरी त्योहारों से भरपूर महीना है देश के अलग अलग कोनों में अनेक तरह के त्योहार मनाए जा रहे और उनकी ख़ास बात यह है कि सभी त्योहारों के नाम और मनाने का तरीक़ा तो अलग है पर महत्व एक ही है जी हां मै बात कर रही मकरसंक्रांति, लोहड़ी और पोंगल की ये तीनों ही त्योहार एक समय पर मनाए जाने वाले त्योहार है।अमूमन 14 जनवरी को मनाए जाने वाले इन त्योहारों को सर्दियों के अंत का प्रतीक और नई फसल की कटाई के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
भारत के पंजाब, दिल्ली और हरियाणा राज्यों में इसे मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तिल, गुड़ और मूंगफली का महत्व होता है. उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति और खिचड़ी के नाम से भी मनाया जाता है। कुछ शहरों में मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहा जाता है उत्तर भारत में इस दिन उड़द दाल और चावल की खिचड़ी खाई जाती है। इस दिन तिल, गुड़ और मूंगफली का महत्व होता है. स्नान के बाद लोग दान करते हैं और फिर घी के साथ खिचड़ी खाते हैं।
बात करें अगर पोंगल की तो तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। इसे पूरे 4 दिनों तक मनाया जाता है जिसमें पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल के तौर पर आयोजन होता है ।पोंगल त्योहार पर लोग स्वादिष्ट मिठाई और चावल के व्यंजन बनाते हैं. चावल को दूध और गुड़ के साथ उबाला जाता है।

वहीं सिखों और पंजाबियों के लिए लोहड़ी खास मायने रखती है इसे मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाते है इस त्योहार की तैयारियां कुछ दिन पहले से ही शुरू हो जाती हैं। लोहड़ी के पर्व को आग के चिरागों को जलाकर गर्मी और फलों की बुराई को दूर करने का एक प्रतीक माना जाता है । लोहड़ी के बाद से ही दिन बड़े होने लगते हैं, यानी माघ मास शुरू हो जाता है। यह त्योहार पूरे विश्व में मनाया जाता है। हालांकि पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ये त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी की रात को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते है ।

ये तीनों त्यौहार देश की अनेकता में एकता का सटीक उद्धारण है क्योंकि वे विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में अलग-अलग रूपों में मनाए जाते हैं, लेकिन इनका महत्व एक ही सिद्धांत पर आधारित है – सूर्य के स्थिति में परिवर्तन और फलों की श्रृंगारिकता का मौका।