
अपने दिल की कह पा रहे हो ?
दूसरे दिल की सुन पा रहे हो ?
प्यार और अधिकार में भेद कर पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
जब चाहे गलती कर पा रहे हो ?
हँसते-हँसते रो पा रहे हो ?
दुखी मन से भी हँस पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
कल से आगे बढ़ पा रहे हो ?
अगले कल से बच पा रहे हो ?
आज में ज़िंदा रह पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
भेदभाव से ऊपर उठ पा रहे हो ?
पूर्वधारणाओं से बच पा रहे हो ?
इंसानियत ज़िंदा रख पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
जुर्म के आगे डट पा रहे हो ?
प्यार के आगे झुक पा रहे हो ?
दोस्त के गले लिपट पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
सर्वप्रथम देश को रख पा रहे हो ?
तिरंगा ऊँचा कर पा रहे हो ?
गर्व से जय हिंद ! कह पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
ख़ुद को स्वतंत्र समझ पा रहे हो ?
दूसरे को स्वतंत्र रख पा रहे हो ?
सही गलत को परख पा रहे हो ?
हाँ ? तो तुम स्वतंत्र हो !
Aksh Gupta, AIMC
