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प्रेम हो तो,हो पूरा
शिव शक्ति जैसा,
जैसे होना कोई वैसा।
हज़ार साल के तप,
के सुनहरे फल जैसा,
एक किताब के,
पहले पन्ने जैसा॥
प्रेम हो तो,हो अधूरा
राधा कृष्ण जैसा,
मन की धरातल पर निर्मित,
दिल की धड़कनों से जुड़ा,
जीवन और सांसों के रिश्ते जैसा।
एक सुंदर सत्य की डोर जैसा॥
प्रेम हो, तो वह,जो पूरा हो के भी अधूरा,
सियाराम जैसा,
विवाह के वचनों पर बना,
एक शुद्ध बंधन जैसा।
जुदाई के ग़म से हो कर,
पवित्रता के रास्ते जैसा॥
प्रेम हो तो हमारे प्रिय भगवान जैसा,
जो अमर रहे हमेशा,
चाँद की चाँदनी,
और दिन दीपक के प्रकाश जैसा।
दिल को छूने वाली मधुर मुरली जैसा॥
